विस्तृत उत्तर
भोजन के उपरांत पाचन शक्ति को सुदृढ़ करने के लिए महर्षि अगस्त्य का स्मरण किया जाता है। मंत्र है: 'अगस्त्यं कुम्भकर्णं च शनिं च बडवानलम्। आहारपरिपाकार्थं स्मरेद्भीमं च पञ्चमम्॥' इस मंत्र का जप करते हुए पेट पर बायां हाथ घुमाना चाहिए। महर्षि अगस्त्य ने समुद्र को पी लिया था और उनकी पाचन शक्ति असीम थी, इसलिए उनका स्मरण करने से खाया हुआ भोजन आसानी से पच जाता है। यह मंत्र न केवल अजीर्ण और गैस जैसी समस्याओं से राहत देता है, बल्कि अन्न के दोषों को दूर कर शरीर को ऊर्जावान बनाता है।





