विस्तृत उत्तर
राम ने रावण का वध ब्रह्मास्त्र से किया था। यह ब्रह्मास्त्र विशेष था क्योंकि यह मूलतः ब्रह्माजी ने स्वयं रावण को वरदान स्वरूप दिया था।
युद्धकाल में एक विशेष घटना हुई — विभीषण ने राम को बताया कि रावण की नाभि में अमृत है इसीलिए वह बार-बार मरने के बाद भी जीवित हो जाता है। उसे केवल उस विशेष ब्रह्मास्त्र से मारा जा सकता है जो ब्रह्माजी ने रावण को स्वयं दिया था और जिसे रावण ने मंदोदरी के कक्ष में छिपाकर रखा था।
हनुमान जी ने वृद्ध ब्राह्मण का वेश धारण करके मंदोदरी के कक्ष से वह दिव्यास्त्र प्राप्त किया और श्रीराम तक पहुँचाया। युद्ध के दौरान ऋषि अगस्त्य मुनि रण-स्थल में आए और उन्होंने राम को 'आदित्य हृदय स्तोत्र' सुनाया और इसी ब्रह्मास्त्र का प्रयोग रावण पर करने को कहा।
वाल्मीकि रामायण के युद्धकांड (सर्ग 108/16,17,18) में वर्णन है — श्रीराम ने अत्यंत शक्तिशाली बाण से रावण की नाभि पर प्रहार किया जिससे उस दुरात्मा का हृदय विदीर्ण हो गया और वह धराशायी हो गया।





