विस्तृत उत्तर
रामायण में अग्नेयास्त्र का उल्लेख कई प्रसंगों में मिलता है।
पहला और प्रमुख उल्लेख बालकांड में है। महर्षि विश्वामित्र ने राम-लक्ष्मण को अपने यज्ञ की रक्षा के लिए बुलाया था। ताड़का के साथी सुबाहु राक्षस विश्वामित्र के यज्ञ में विध्न डाल रहा था। राम ने अग्नेयास्त्र का प्रयोग करके सुबाहु का वध किया। यह अग्नेयास्त्र विश्वामित्र ने ही राम को दिया था।
दूसरा प्रसंग — युद्धकांड में लंका के युद्ध में भी आग्नेयास्त्र के प्रयोग का संकेत मिलता है। जब रावण की सेना के विभिन्न महायोद्धाओं से युद्ध चल रहा था, तब राक्षस सेनाओं के विरुद्ध अग्नेयास्त्र का प्रयोग किया गया।
सुंदरकांड में जब हनुमान जी की पूँछ में आग लगाई गई और उन्होंने लंका में आग लगाई — उसे अग्नेयास्त्र की अभिव्यक्ति के रूप में भी देखा जाता है।
सबसे पहले और सबसे स्पष्ट उपयोग बालकांड में विश्वामित्र के यज्ञ रक्षा प्रसंग में सुबाहु वध के लिए हुआ — यही इस अस्त्र का सर्वाधिक प्रसिद्ध प्रयोग है।





