विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में यममार्ग पर भोजन की व्यवस्था का वर्णन जीव के कर्मों और परिजनों के कर्तव्य के सन्दर्भ में किया गया है।
पिंडदान से भोजन — गरुड़ पुराण में बताया गया है कि जीव को यममार्ग पर जो भोजन मिलता है, वह पिंडदान के रूप में है। परिजनों द्वारा दिए गए प्रत्येक पिंड से जीव के सूक्ष्म शरीर का निर्माण होता है और उसे ऊर्जा मिलती है। तेरह दिनों तक किया गया पिंडदान 'मृत आत्मा के लिए भोजन का काम करता है।'
दानी जीवों से मिलने वाला भोजन — गरुड़ पुराण में उल्लेख है कि यममार्ग पर जिन जीवों ने दान किए होते हैं, उन्हें मार्ग में भोजन मिलता है। पापी जीव इन्हें देखकर माँगता है पर यमदूत उसे नहीं लेने देते।
जीवन के दान का फल — जिसने जीवन में अन्नदान किया हो, उसे यममार्ग पर उसी दान का फल मिलता है। शास्त्र में बताया गया है कि मार्ग में कहीं-कहीं ऐसे स्थान हैं जहाँ पुण्यकर्मी जीवों को पोषण मिलता है।
पापियों के लिए — जिसने दान नहीं किया, उसे मार्ग पर कुछ नहीं मिलता। भूखा-प्यासा, कोड़े खाता हुआ वह आगे बढ़ता रहता है — यही उसका 'भोजन' है।





