विस्तृत उत्तर
रात्रि में सुखद, शांत और निर्बाध निद्रा के लिए शयन (सोने) से पूर्व दिनभर के विचारों को शांत करना आवश्यक है। पुराणों में सोने से ठीक पहले कुछ विशिष्ट मुनियों और श्लोकों के स्मरण का विधान बताया गया है।
गहरी नींद के लिए यह मंत्र सबसे प्रामाणिक है—'अगस्तिर्माधवश्चैव मुचुकुन्दो महामुनिः। कपिलो मुनिरास्तीकः पञ्चैते सुखशायिनः॥' इस श्लोक में अगस्त्य, माधव, मुचुकुन्द, कपिल और आस्तीक—इन पांच महान ऋषियों का स्मरण किया गया है जिन्हें सुखपूर्वक सोने का वरदान प्राप्त था। बिस्तर पर लेटकर आंखें बंद करें और लंबी सांसें लेते हुए इस मंत्र का मानसिक जप करें। इसके अतिरिक्त 'ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः' का मानसिक स्मरण भी मस्तिष्क की नसों को शांत कर अच्छी नींद लाता है।




