विस्तृत उत्तर
पंचाक्षर मंत्र की साधना से प्राप्त होने वाली वास्तविक सिद्धियाँ साधक का आंतरिक रूपांतरण करती हैं:
- ▸चित्त-शुद्धि एवं पाप-नाश: मंत्र के जप से उत्पन्न आध्यात्मिक अग्नि जन्म-जन्मांतर के संचित पाप-कर्मों और कुसंस्कारों को भस्म कर देती है।
- ▸मानसिक शांति एवं अभय: यह मंत्र मन की चंचलता, तनाव, क्रोध, भय और चिंता को शांत करता है।
- ▸सर्व-मनोरथ-सिद्धि: महादेव की कृपा से साधक के सभी सात्विक मनोरथ स्वयं ही पूर्ण होने लगते हैं।
- ▸वचन सिद्धि: कुछ साधकों को 'वचन सिद्धि' भी प्राप्त होती है।
- ▸शिव कृपा एवं मोक्ष: साधक जीवन के अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है।





