विस्तृत उत्तर
शास्त्रों के अनुसार, नित्य देव-यज्ञ करने वाले व्यक्ति के घर में देवताओं का सानिध्य होता है, पापों का शमन होता है, और चित्त की वृत्तियां शुद्ध होती हैं।
इदन्न मम' का निरंतर अभ्यास व्यक्ति को स्वार्थ से परमार्थ की ओर, और व्यष्टि (Individual) से समष्टि (Cosmos) की ओर ले जाता है। गायत्री मंत्र और मृत्युंजय मंत्र की आहुतियों से व्यक्ति के प्रभामंडल (Aura) में सकारात्मकता और आत्मिक बल का संचार होता है।





