विस्तृत उत्तर
साधना का सर्वोच्च फल है — भगवान शिव की अहैतुकी कृपा की प्राप्ति। यही परम सिद्धि है।
इस कृपा से साधक जीवन के अंत में शिवलोक को प्राप्त करता है और जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्त हो जाता है। वह 'शिवत्व' अर्थात शिव-चेतना के साथ एकाकार हो जाता है।
यह मंत्रराज समस्त वेदों का सारतत्व है और साधक को लौकिक एवं पारलौकिक सुख प्रदान कर अंत में मोक्ष की ओर ले जाता है।





