विस्तृत उत्तर
मार्कण्डेय पुराण में मदालसा और उनके पुत्र अलर्क का एक अत्यंत दार्शनिक और प्रसिद्ध संवाद है। रानी मदालसा अपने नवजात पुत्रों को पालने में झुलाते हुए ब्रह्मज्ञान का उपदेश देती हैं। मदालसा अपने उपदेशों में जीव के जन्म-मरण, कर्म-बंधन और त्रैलोक्य (भूः, भुवः, स्वः) की नश्वरता का विस्तृत वर्णन करती हैं। वे स्पष्ट करती हैं कि ये सभी लोक चाहे वह भुवर्लोक हो या स्वर्ग आत्मा के लिए अस्थायी पड़ाव मात्र हैं और अंतिम लक्ष्य 'मोक्ष' ही होना चाहिए। इस उपदेश का सार यह है कि भुवर्लोक की सिद्धियाँ और वहाँ का दीर्घ निवास भी आत्मा को कर्म-बंधन से मुक्त नहीं कर सकता।
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