विस्तृत उत्तर
संमोहनास्त्र के प्रभाव का वर्णन पुराणों और महाकाव्यों में मिलता है।
प्रत्यक्ष प्रभाव — जब संमोहनास्त्र चलाया जाता है तो शत्रु-पक्ष के योद्धाओं पर तत्काल एक दिव्य मोह छा जाता है। उनकी आंखें भारी होने लगती हैं और वे निद्रा की अवस्था में चले जाते हैं।
युद्ध-क्षमता का नाश — संमोहनास्त्र के प्रभाव में आने पर योद्धा अपने अस्त्र-शस्त्र छोड़ देते हैं। उन्हें यह भी याद नहीं रहता कि वे युद्धभूमि में हैं। वे एक प्रकार के सम्मोहन या निद्रा में पड़ जाते हैं।
सेना पर सामूहिक प्रभाव — यह अस्त्र एक बार में पूरी सेना पर प्रभाव डाल सकता था। एक-एक योद्धा नहीं, बल्कि बड़ा दल इसकी चपेट में आ सकता था।
स्थायित्व — यह प्रभाव अस्थायी होता था। जब अस्त्र का प्रभाव समाप्त होता था या प्रतिकार किया जाता था तब योद्धा पुनः सचेत हो जाते थे।




