विस्तृत उत्तर
कुंडलिनी जागरण बाद अनिद्रा = प्रचलित अनुभव।
कारण: (1) ऊर्जा अधिक्य — शरीर-मन शांत होने में असमर्थ (2) तंत्रिका तंत्र अति-सक्रिय (Sympathetic↑, Parasympathetic↓) (3) चक्र-शुद्धि रात में जारी (4) आध्यात्मिक अनुभवों से मानसिक उत्तेजना (5) शास्त्रीय: उन्नत साधकों को कम नींद पर्याप्त।
उपाय: (1) गुरु-परामर्श (सर्वप्रथम — साधना गति समायोजित) (2) साधना तीव्रता कम (शाम केवल शांत ध्यान) (3) ग्राउंडिंग — नंगे पैर जमीन, भारी भोजन, शारीरिक श्रम, प्रकृति, ठंडा पानी (4) योग निद्रा (नींद विकल्प) (5) चन्द्र भेदन प्राणायाम (बायीं नासिका — शीतलता) (6) दूध+हल्दी रात को (7) सोने पूर्व आध्यात्मिक चर्चा/पुस्तक नहीं।
सावधानी: 2-3 सप्ताह+ = चिकित्सक+गुरु। अनिद्रा+चिंता+अनियंत्रित विचार = 'कुंडलिनी सिंड्रोम' सम्भव। 'उन्नत अनुभव' मान उपेक्षा न करें।





