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कुंडलिनी योग📜 हठयोग प्रदीपिका, कुंडलिनी सिंड्रोम साहित्य1 मिनट पठन

कुंडलिनी जागरण के बाद अनिद्रा क्यों होती है?

संक्षिप्त उत्तर

कारण: ऊर्जा अधिक्य, तंत्रिका अति-सक्रिय, चक्र-शुद्धि, उत्तेजना। उपाय: गुरु, साधना↓, ग्राउंडिंग, योग निद्रा, चन्द्र भेदन, दूध+हल्दी। 2-3 सप्ताह+=चिकित्सक।

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विस्तृत उत्तर

कुंडलिनी जागरण बाद अनिद्रा = प्रचलित अनुभव।

कारण: (1) ऊर्जा अधिक्य — शरीर-मन शांत होने में असमर्थ (2) तंत्रिका तंत्र अति-सक्रिय (Sympathetic↑, Parasympathetic↓) (3) चक्र-शुद्धि रात में जारी (4) आध्यात्मिक अनुभवों से मानसिक उत्तेजना (5) शास्त्रीय: उन्नत साधकों को कम नींद पर्याप्त।

उपाय: (1) गुरु-परामर्श (सर्वप्रथम — साधना गति समायोजित) (2) साधना तीव्रता कम (शाम केवल शांत ध्यान) (3) ग्राउंडिंग — नंगे पैर जमीन, भारी भोजन, शारीरिक श्रम, प्रकृति, ठंडा पानी (4) योग निद्रा (नींद विकल्प) (5) चन्द्र भेदन प्राणायाम (बायीं नासिका — शीतलता) (6) दूध+हल्दी रात को (7) सोने पूर्व आध्यात्मिक चर्चा/पुस्तक नहीं।

सावधानी: 2-3 सप्ताह+ = चिकित्सक+गुरु। अनिद्रा+चिंता+अनियंत्रित विचार = 'कुंडलिनी सिंड्रोम' सम्भव। 'उन्नत अनुभव' मान उपेक्षा न करें।

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शास्त्रीय स्रोत
हठयोग प्रदीपिका, कुंडलिनी सिंड्रोम साहित्य
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