विस्तृत उत्तर
गुरु = 'अनिवार्य' (केवल अनुशंसित नहीं)।
कारण: (1) सुरक्षा — अत्यन्त शक्तिशाली ऊर्जा, बिना मार्गदर्शन खतरनाक (उच्च-वोल्टेज बिजली बिना प्रशिक्षण) (2) शक्तिपात — सबसे सुरक्षित+तीव्र विधि, गुरु अपनी शक्ति शिष्य में प्रवाहित (3) अनुभव-आधारित — भ्रम vs दिव्य कौन बताए? (4) साधना समायोजन — प्रत्येक शिष्य भिन्न (5) अहंकार नियंत्रण — सिद्धियों में पतन रोकना (6) कुलार्णव तंत्र: 'गुरुःसाक्षात् परं ब्रह्म' (7) शिव संहिता: 'गुरोः कृपा प्रसादेन कुंडलिनी प्रबोधयेत्।'
बिना गुरु जोखिम: कुंडलिनी सिंड्रोम, मानसिक अस्थिरता, शारीरिक हानि, अहंकार↑, साधना पतन।
योग्य गुरु: स्वयं अनुभवी/सिद्ध, गुरु-परम्परा, शांत/निरहंकारी, धन/प्रसिद्धि लालसा रहित, शिष्य परीक्षा ले।





