ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
कुंडलिनी योग📜 हठयोग प्रदीपिका, शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद1 मिनट पठन

कुंडलिनी जागरण में रीढ़ में बिजली दौड़ने जैसा अनुभव क्यों होता है?

संक्षिप्त उत्तर

कारण: कुंडलिनी सुषुम्ना (रीढ़ भीतर) से ऊपर = तीव्र ऊर्जा। इड़ा-पिंगला विलय। 3 ग्रन्थि (ब्रह्म/विष्णु/रुद्र) भेदन = तीव्रतम। प्रकार: झनझनाहट→करंट→तरंग→कम्पन। सामान्य — भयभीत नहीं। दर्दनाक=गुरु।

📖

विस्तृत उत्तर

रीढ़ में बिजली/करंट = कुंडलिनी जागरण का सर्वाधिक प्रचलित अनुभव।

कारण (शास्त्रीय)

1. सुषुम्ना नाड़ी: रीढ़ भीतर सूक्ष्म नाड़ी। कुंडलिनी इसी से मूलाधार→सहस्रार। प्रवेश = तीव्र ऊर्जा = बिजली।

2. इड़ा-पिंगला विलय: सामान्यतः प्राण इड़ा(चन्द्र/बायीं)+पिंगला(सूर्य/दाहिनी) में। सुषुम्ना प्रवेश (विलय) = असामान्य+तीव्र।

3. चक्र-भेदन: 7 चक्र सुषुम्ना पर। भेदन = विशेष तीव्र ऊर्जा = बिजली/स्पंदन/दबाव।

4. तीन ग्रन्थि भेदन: ब्रह्म ग्रन्थि (मूलाधार), विष्णु ग्रन्थि (अनाहत), रुद्र ग्रन्थि (आज्ञा)। भेदन = तीव्रतम ऊर्जा विस्फोट।

अनुभव प्रकार: हल्की झनझनाहट (प्रारम्भ) → विद्युत करंट (मध्यम) → तीव्र तरंग (उन्नत) → सम्पूर्ण शरीर कम्पन (गहन) → ऊष्मा+विद्युत+प्रकाश एक साथ (चरम)।

सावधानी: सामान्य है — भयभीत न हों। तीव्र/दर्दनाक = रोकें, गुरु। बलपूर्वक प्रयास न करें। पीठ/रीढ़ चिकित्सीय समस्या = पहले चिकित्सक।

📜
शास्त्रीय स्रोत
हठयोग प्रदीपिका, शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

रीढ़ ऊर्जासुषुम्नाविद्युत अनुभवकुंडलिनी प्रवाह

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

कुंडलिनी जागरण में रीढ़ में बिजली दौड़ने जैसा अनुभव क्यों होता है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको कुंडलिनी योग से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर हठयोग प्रदीपिका, शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।