विस्तृत उत्तर
रीढ़ में बिजली/करंट = कुंडलिनी जागरण का सर्वाधिक प्रचलित अनुभव।
कारण (शास्त्रीय)
1. सुषुम्ना नाड़ी: रीढ़ भीतर सूक्ष्म नाड़ी। कुंडलिनी इसी से मूलाधार→सहस्रार। प्रवेश = तीव्र ऊर्जा = बिजली।
2. इड़ा-पिंगला विलय: सामान्यतः प्राण इड़ा(चन्द्र/बायीं)+पिंगला(सूर्य/दाहिनी) में। सुषुम्ना प्रवेश (विलय) = असामान्य+तीव्र।
3. चक्र-भेदन: 7 चक्र सुषुम्ना पर। भेदन = विशेष तीव्र ऊर्जा = बिजली/स्पंदन/दबाव।
4. तीन ग्रन्थि भेदन: ब्रह्म ग्रन्थि (मूलाधार), विष्णु ग्रन्थि (अनाहत), रुद्र ग्रन्थि (आज्ञा)। भेदन = तीव्रतम ऊर्जा विस्फोट।
अनुभव प्रकार: हल्की झनझनाहट (प्रारम्भ) → विद्युत करंट (मध्यम) → तीव्र तरंग (उन्नत) → सम्पूर्ण शरीर कम्पन (गहन) → ऊष्मा+विद्युत+प्रकाश एक साथ (चरम)।
सावधानी: सामान्य है — भयभीत न हों। तीव्र/दर्दनाक = रोकें, गुरु। बलपूर्वक प्रयास न करें। पीठ/रीढ़ चिकित्सीय समस्या = पहले चिकित्सक।





