विस्तृत उत्तर
वेदान्त दर्शन, विशेषकर छान्दोग्य और बृहदारण्यक उपनिषदों में देवयान मार्ग के वर्णन में सुषुम्ना नाड़ी का महत्वपूर्ण उल्लेख है। जब कोई सगुण-ब्रह्म का उपासक या ऊर्ध्वरेता संन्यासी मृत्यु को प्राप्त होता है तो उसकी आत्मा सुशुम्ना नाड़ी से होकर शरीर से बाहर निकलती है। सुषुम्ना नाड़ी मेरुदंड (रीढ़ की हड्डी) में स्थित मध्य नाड़ी है जो शरीर का सर्वोच्च ऊर्जा चैनल है। योगशास्त्र में यह नाड़ी मोक्ष और उच्च लोकों की यात्रा का द्वार मानी जाती है। देवयान मार्ग से सत्यलोक की यात्रा करने के लिए आत्मा का इसी सुषुम्ना मार्ग से निकलना आवश्यक है।
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