विस्तृत उत्तर
जो साधक योग-मार्ग पर हैं परंतु जिन्हें पूर्ण वैराग्य और आत्म-ज्ञान प्राप्त नहीं हुआ है वे अपनी योग-सिद्धियों के फलस्वरूप मृत्यु के बाद भुवर्लोक के सर्वोच्च स्तर अर्थात सिद्धलोक में जन्म लेते हैं। यह इसलिए होता है क्योंकि उनकी तपस्या और साधना ने उन्हें भूलोक से ऊपर उठाया परंतु पूर्ण वैराग्य के अभाव में वे स्वर्लोक या उससे ऊँचे लोकों तक नहीं पहुँच पाते। सिद्धलोक भुवर्लोक का सर्वोच्च और सबसे पवित्र क्षेत्र है जो राहु के ठीक नीचे स्थित है। यहाँ वे अष्ट-सिद्धियों से युक्त होकर दीर्घ काल तक निवास करते हैं। परंतु गीता के अनुसार यहाँ भी उनके पुण्य क्षीण होने पर उन्हें पुनः पृथ्वी पर जन्म लेना पड़ता है।
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