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देवयान से जुड़े सभी प्रश्न(6)

देवयान पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 6 प्रश्न उपलब्ध हैं।

लोक

क्रम मुक्ति और सद्यो मुक्ति में क्या अंतर है?

सद्यो मुक्ति = इसी जन्म में निर्गुण साक्षात्कार से तत्काल मोक्ष — सत्यलोक की यात्रा नहीं। क्रम मुक्ति = देवयान से सत्यलोक, फिर ब्रह्मज्ञान, फिर महाप्रलय में मोक्ष।

#क्रम मुक्ति#सद्यो मुक्ति#अंतर
लोक

देवयान मार्ग में कौन-कौन से लोक पड़ते हैं?

देवयान मार्ग में — अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण, देवलोक, वायु, वरुण, इंद्र, प्रजापति, सूर्य, विद्युत — और फिर अमानव पुरुष सत्यलोक ले जाता है।

#देवयान#लोक#अर्चिस
लोक

सुषुम्ना नाड़ी का सत्यलोक से क्या संबंध है?

मृत्यु के समय सगुण उपासक की आत्मा सुषुम्ना नाड़ी (रीढ़ की मध्य नाड़ी) से बाहर निकलती है और देवयान मार्ग से सत्यलोक की यात्रा करती है।

#सुषुम्ना#नाड़ी#देवयान
लोक

देवयान मार्ग क्या है?

देवयान मार्ग वह दिव्य मार्ग है जिससे आत्मा मृत्यु के बाद अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण के देवताओं के लोकों से होते हुए सत्यलोक पहुँचती है।

#देवयान#मार्ग#आत्मा
लोक

सत्यलोक कैसे जाते हैं?

सत्यलोक जाने के लिए कठोर तपस्या, निष्काम भक्ति और अखंड ब्रह्मचर्य आवश्यक है। मृत्यु के बाद देवयान मार्ग से आत्मा सत्यलोक पहुँचती है।

#सत्यलोक#यात्रा#देवयान
मकर संक्रांति परिचय

उत्तरायण क्या होता है — देवयान क्यों कहते हैं?

उत्तरायण = 'देवयान' — अंधकार से प्रकाश, मृत्यु से अमरता, नकारात्मकता से सकारात्मकता की ओर। दक्षिणायन = 'पितृयान'। मकर संक्रांति = उत्तरायण का प्रथम दिन — पितरों की विदाई और देवताओं के स्वागत का पर्व।

#उत्तरायण#देवयान#दक्षिणायन
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