विस्तृत उत्तर
किसी भी साधारण या सकाम कर्म में लिप्त जीव का सत्यलोक तक पहुँचना सर्वथा असम्भव है। पृथ्वी लोक से सत्यलोक तक की यात्रा किसी भौतिक यान या कृत्रिम यन्त्र के माध्यम से नहीं की जा सकती। श्रीमद्भागवत (२.२.२३) में स्पष्ट किया गया है कि केवल वे योगी और भक्त जो कठोर तपस्या, निष्काम भक्ति, रहस्यमयी योग शक्तियों और पारलौकिक ज्ञान से सम्पन्न हैं वही अपने सूक्ष्म आध्यात्मिक शरीरों के माध्यम से इन लोकों में बिना किसी बाधा के यात्रा कर सकते हैं। मृत्यु के बाद आत्मा देवयान मार्ग से जाती है — अर्चिस, दिन, शुक्ल पक्ष, उत्तरायण के देवताओं के लोकों से होते हुए विद्युत लोक तक और वहाँ से एक अमानव पुरुष उसे सत्यलोक ले जाता है।
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