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कुंडलिनी योग📜 हठयोग प्रदीपिका, कुंडलिनी सिंड्रोम साहित्य1 मिनट पठन

कुंडलिनी जागरण के बाद भावनात्मक उथल-पुथल क्यों होती है?

संक्षिप्त उत्तर

कारण: दबी भावनाएँ सतह पर, अनाहत शुद्धि, अहंकार विघटन, संवेदनशीलता↑, कर्म-दहन। उपाय: स्वीकार, रोना=शुद्धि, जर्नलिंग, प्रकृति, व्यायाम, धैर्य। अवसाद/आत्मघाती=तुरंत विशेषज्ञ।

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विस्तृत उत्तर

कुंडलिनी बाद भावनात्मक उथल-पुथल = सामान्य+अपेक्षित।

कारण: (1) संचित दबी भावनाएँ (क्रोध/दुःख/भय) चक्रों में संग्रहित — शुद्धि पर सतह पर = अचानक रोना/क्रोध/दुःख (2) अनाहत (हृदय) शुद्धि = तीव्रतम — पुरानी पीड़ाएँ, बचपन आघात उभरना (3) अहंकार विघटन — पहचान हिलना = अस्थिरता (4) संवेदनशीलता↑ — दूसरों की भावनाएँ अपनी (5) कर्म-दहन — संचित कर्म जलना = भावनात्मक तूफान।

उपाय: (1) स्वीकार — दबाएँ नहीं (Suppress=बाद तीव्र) (2) रोना = Emotional Detox (3) जर्नलिंग (4) प्रकृति (5) शारीरिक गतिविधि — दौड़/तैरना/नृत्य (6) गुरु-सत्संग (7) धैर्य — अस्थायी।

सावधानी: लम्बे समय अवसाद, आत्मघाती विचार, वास्तविकता से कटाव = तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ।

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शास्त्रीय स्रोत
हठयोग प्रदीपिका, कुंडलिनी सिंड्रोम साहित्य
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