कुंडलिनी जागरण में रीढ़ में बिजली दौड़ने जैसा अनुभव क्यों होता है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
कारण: कुंडलिनी सुषुम्ना (रीढ़ भीतर) से ऊपर = तीव्र ऊर्जा। इड़ा-पिंगला विलय। 3 ग्रन्थि (ब्रह्म/विष्णु/रुद्र) भेदन = तीव्रतम। प्रकार: झनझनाहट→करंट→तरंग→कम्पन। सामान्य — भयभीत नहीं। दर्दनाक=गुरु।
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