ॐ नमः शिवाय  |  जय श्री राम  |  हरे कृष्ण
📿
धर्म-संबंधी शंका हो? शास्त्रों में उत्तर है।
पौराणिक प्रश्नोत्तरी — वेद, पुराण और तंत्र-शास्त्रों से प्रमाणित उत्तर, सरल हिंदी में
सभी प्रश्न देखें →
कुंडलिनी योग📜 हठयोग प्रदीपिका (4.70-72), शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र1 मिनट पठन

सहस्रार चक्र जागृत होने पर अमृत की अनुभूति कैसी होती है?

संक्षिप्त उत्तर

सहस्रार: (1) तालु शीतल-मधुर रस (अमृत धारा — सूक्ष्म) (2) परमानन्द (शब्दातीत) (3) शिव-शक्ति ऐक्य (4) तीव्र श्वेत/स्वर्णिम प्रकाश (5) समाधि (6) मस्तक फव्वारा/चींटियाँ। अत्यन्त दुर्लभ — अधिकांश दावे अतिशयोक्ति।

📖

विस्तृत उत्तर

सहस्रार (मस्तक शीर्ष, ब्रह्मरन्ध्र) = सर्वोच्च चक्र, 1000 पंखुड़ी कमल। कुंडलिनी सहस्रार तक = शिव-शक्ति ऐक्य।

अमृत अनुभूति

1. 'अमृत' (शास्त्रीय): हठयोग प्रदीपिका: सहस्रार में सूक्ष्म अमृत स्रोत। सामान्यतः जठराग्नि में नष्ट। कुंडलिनी जागरण = अमृत संरक्षित = दिव्यानन्द।

2. अनुभूति: तालु (मुख ऊपरी भाग) में शीतल, मधुर रस — जैसे मीठा शीतल द्रव्य टपक रहा। 'अमृत धारा'/'सोमरस'। भौतिक नहीं — सूक्ष्म ऊर्जात्मक। अत्यन्त आनन्ददायक।

3. परमानन्द: शब्दातीत। सत्-चित्-आनन्द प्रत्यक्ष। बाह्य कारण रहित — स्वयं से उत्पन्न, अनन्त, अक्षय।

4. शिव-शक्ति ऐक्य: कुंडलिनी(शक्ति) + शिव = एक। द्वैत समाप्त — 'अहं ब्रह्मास्मि' साक्षात्कार।

5. श्वेत/स्वर्णिम प्रकाश: 'सहस्र सूर्यों का प्रकाश' (गीता)।

6. समाधि: शरीर-मन-बुद्धि से परे — शुद्ध चेतना। काल-स्थान बोध समाप्त। 'मैं' विलय।

7. शारीरिक: मस्तक शीर्ष (चोटी) पर चींटियाँ, फव्वारा जैसा, शरीर अत्यन्त हल्का, श्वास सूक्ष्म/लगभग रुकना (समाधि में)।

सावधानी: अत्यन्त दुर्लभ — अधिकांश दावे अतिशयोक्ति। पूर्ण जागरण=जीवनमुक्ति। बिना गुरु असम्भव+खतरनाक। शब्दों में वर्णन असम्भव।

📜
शास्त्रीय स्रोत
हठयोग प्रदीपिका (4.70-72), शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र
क्या यह उत्तर उपयोगी था? इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें

🏷 सम्बंधित विषय

सहस्रार चक्रअमृतसमाधिपरमानन्दशिव-शक्ति ऐक्य

इसी विषय के अन्य प्रश्न

📚

विस्तार से पढ़ें

इस विषय पर हमारे विस्तृत लेख और मार्गदर्शिकाएँ

सहस्रार चक्र जागृत होने पर अमृत की अनुभूति कैसी होती है — शास्त्रों के अनुसार

पौराणिक पर आपको कुंडलिनी योग से जुड़े प्रमाणिक प्रश्न-उत्तर मिलेंगे। यह उत्तर हठयोग प्रदीपिका (4.70-72), शिव संहिता, योगकुंडलिनी उपनिषद, विज्ञान भैरव तंत्र पर आधारित है। अन्य प्रश्नों के लिए प्रश्नोत्तरी पृष्ठ देखें।