मंत्र विधिमंत्र जप में गुरु का मार्गदर्शन कैसे लें?गुरु = सबसे महत्वपूर्ण। पहचान: शास्त्र+अनुभव, निःस्वार्थ, परंपरा, शुद्ध आचरण। कैसे: दीक्षा, नियमित संपर्क, प्रश्न, आज्ञा पालन, सेवा। न मिले: सद्ग्रंथ=गुरु, नाम जप, ईश्वर से प्रार्थना।#गुरु#मार्गदर्शन#शिष्य
गुरु परंपराआधुनिक युग में गुरु कैसे ढूंढें?गीता(4.34): ज्ञानियों के पास जाओ, प्रणाम+प्रश्न+सेवा करो। शास्त्र पहले पढ़ें, सत्संग जाएँ, कई गुरु सुनें, शास्त्र+आचरण परखें। 'शिष्य तैयार=गुरु मिलते हैं।'#गुरु#ढूंढना#आधुनिक
अंत्येष्टि संस्कारमृत्यु के बाद दीपक क्यों जलाते रहते हैं 13 दिनगरुड़ पुराण: 13 दिन आत्मा प्रेत शरीर में घर के पास — दीपक = मार्गदर्शन, शांति, सकारात्मक ऊर्जा। यमलोक यात्रा तक सहारा। मृतक के स्थान पर सरसों/तिल तेल दीपक।#दीपक#13 दिन#प्रेत
स्वप्न शास्त्रसपने में तारे दिखने का अर्थतारे = शुभ। आशा, मार्गदर्शन (ध्रुव तारा), भाग्योदय, सफलता, ईश्वर कृपा। चमकते=सफलता; टूटता=इच्छा पूर्ति; अनगिनत=संभावनाएं। सार्वभौमिक शुभ।#तारे#सपना#आशा
कुंडलिनी योगकुंडलिनी जागरण में गुरु का मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है?अनिवार्य: सुरक्षा (शक्तिशाली ऊर्जा), शक्तिपात=सबसे सुरक्षित, भ्रम vs दिव्य=गुरु बताए, साधना समायोजन, अहंकार नियंत्रण। शिव संहिता: 'गुरु कृपा से कुंडलिनी।' बिना=सिंड्रोम/अस्थिरता/पतन।#गुरु#शक्तिपात#मार्गदर्शन