कुंडलिनी जागरण में गुरु का मार्गदर्शन क्यों आवश्यक है?
का सरल उत्तर
सरल उत्तर
अनिवार्य: सुरक्षा (शक्तिशाली ऊर्जा), शक्तिपात=सबसे सुरक्षित, भ्रम vs दिव्य=गुरु बताए, साधना समायोजन, अहंकार नियंत्रण। शिव संहिता: 'गुरु कृपा से कुंडलिनी।' बिना=सिंड्रोम/अस्थिरता/पतन।
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