विस्तृत उत्तर
सत्यलोक के निवासियों को अन्न, जल या किसी भी भौतिक वस्तु की आवश्यकता नहीं होती। वे केवल ध्यान और ज्ञान के रस से पोषित होते हैं। इसके कई कारण हैं। पहला — सत्यलोक पूर्ण रूप से विशुद्ध सत्वगुण से निर्मित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का लेशमात्र भी प्रवेश नहीं है। शरीर को भोजन की आवश्यकता तभी होती है जब वह पंचभौतिक और रजो-तमो गुणी हो। द्वितीय — सत्यलोक के निवासियों का शरीर चिन्मय और सात्विक है जो भौतिक अन्न पर नहीं बल्कि ब्रह्माण्डीय ऊर्जा पर जीवित रहता है। तृतीय — ये ऊर्ध्वरेता मुनि वे हैं जिन्होंने अपनी समस्त प्राण-ऊर्जा को आध्यात्मिक तेज में परिवर्तित कर लिया है और ध्यान की अग्नि से ही पोषण प्राप्त करते हैं।
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