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श्राद्ध एवं पितृ कर्म📜 गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु, भक्ति परंपरा1 मिनट पठन

पितृपक्ष में गरीबों को भोजन कराने का पुण्य

संक्षिप्त उत्तर

गरीब भोजन = पितर तृप्ति + विष्णु सेवा + ब्राह्मण भोज समकक्ष (प्रश्न 583)। मृतक नाम से संकल्प करके खिलाएं। अनाथालय/वृद्धाश्रम = अत्यंत पुण्यदायक। पितृपक्ष में सर्वोच्च पुण्य कर्म।

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विस्तृत उत्तर

पितृपक्ष में गरीबों/जरूरतमंदों को भोजन कराना = सर्वोच्च पुण्य कर्मों में।

पुण्य

  1. 1पितर तृप्ति — गरीब को भोजन = पितर को भोजन पहुंचना (ऐसी मान्यता)।
  2. 2विष्णु प्रसन्नता — 'नारायण = दीन-दुखियों में' — गरीब सेवा = विष्णु सेवा।
  3. 3ब्राह्मण भोज के समकक्ष — ब्राह्मण न मिले तो गरीब भोज = समान पुण्य (प्रश्न 583)।
  4. 4सामूहिक पुण्य — अनेक गरीबों को खिलाना = अनेक गुना पुण्य।
  5. 5सामाजिक कर्तव्य — धर्म + सेवा = सार्थक।

विधि: मृतक नाम से संकल्प करके गरीबों को भोजन कराएं। 'मम (गोत्र)... पितृदेवताभ्यो... अन्नदानं करिष्ये।'

आधुनिक: अनाथालय, वृद्धाश्रम, गरीब बस्ती में भोजन = अत्यंत पुण्यदायक और सामाजिक रूप से सार्थक।

सार: पितृपक्ष में गरीब भोजन = ब्राह्मण भोज + विष्णु सेवा + पितर तृप्ति — तीनों एक साथ।

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शास्त्रीय स्रोत
गरुड़ पुराण, धर्मसिंधु, भक्ति परंपरा
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