विस्तृत उत्तर
महालया (आश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या = पितृपक्ष/श्राद्ध पक्ष = 15 दिन) में पितरों के पृथ्वी आगमन की मान्यता शास्त्रसम्मत है।
शास्त्रीय प्रमाण
1. गरुड पुराण: पितृपक्ष में यमराज पितरों (मृत पूर्वजों) को अपने लोक से मुक्त करते हैं ताकि वे पृथ्वी पर अपने वंशजों के पास आएँ और तर्पण/श्राद्ध ग्रहण करें। 15 दिन पितर पृथ्वी के निकट = श्राद्ध/तर्पण ग्रहण हेतु।
2. मार्कण्डेय पुराण: यमराज पितृपक्ष में पितरों को 'छुट्टी' देते हैं — वे वंशजों के घर आते हैं, तृप्ति पाते हैं।
3. विष्णु पुराण: श्राद्ध न करने पर पितर शाप देते हैं, करने पर आशीर्वाद = संकेत कि पितर उपस्थित और सचेत।
4. महाभारत (अनुशासन पर्व): भीष्म ने युधिष्ठिर को श्राद्ध का विस्तृत विधान बताया — पितर तिल-जल-कुश से तृप्त होते हैं।
5. बंगाल विशेष: 'महालया' = पितृपक्ष की अन्तिम अमावस्या (सर्वपितृ अमावस्या)। बंगाल में प्रातः रेडियो पर महालया प्रसारण = देवी आह्वान। पितृपक्ष समाप्त → नवरात्रि आरम्भ।
सन्तुलित दृष्टि: यह शास्त्रीय मान्यता है (गरुड/मार्कण्डेय/विष्णु पुराण)। वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं। श्रद्धा और पितृ सम्मान की भावना सर्वप्रधान — 'श्रद्धया दीयते यत्तत् श्राद्धम्'।





