विस्तृत उत्तर
गंगा दशहरा (ज्येष्ठ शुक्ल दशमी) पर गंगा स्नान से 10 प्रकार के पापों का नाश होता है। 'दशहरा' = 'दश' (दस) + 'हरा' (नाश) = दस पापों का नाश।
10 पाप (3+4+3)
3 कायिक (शारीरिक): (1) शास्त्रनिषिद्ध हिंसा (2) चोरी/परद्रव्य हरण (3) परस्त्री/परपुरुष गमन।
4 वाचिक (वाणी): (4) कठोर वचन (5) असत्य भाषण (6) चुगली/निन्दा (7) अनर्गल/व्यर्थ बकवास।
3 मानसिक (मन): (8) परधन की लालसा (9) दूसरे का बुरा सोचना (10) मिथ्या दृष्टिकोण/अन्धविश्वास।
शास्त्रीय उक्ति
ज्येष्ठे मासि सिते पक्षे दशमी हस्तसंयुता। हरते दशपापानि तस्माद् दशहरा स्मृता॥' (ब्रह्मपुराण)
दस दिव्य योग: ज्येष्ठ मास + शुक्ल पक्ष + दशमी + बुधवार + हस्त नक्षत्र + व्यतिपात योग + गर करण + आनन्द योग + कन्या चन्द्र + वृष सूर्य — इन 10 योगों में गंगा अवतरित हुईं।
विशेष: 10 बार डुबकी, 10 प्रकार का दान (10 ब्राह्मणों को), 10 बार गंगा स्तोत्र पाठ।
भविष्य पुराण: ब्रह्म मुहूर्त में गंगा स्नान + 10 बार 'ॐ नमो भगवति हिलि हिलि मिलि मिलि गंगे माँ पावय पावय स्वाहा' = सभी जन्मों के पाप नष्ट।





