विस्तृत उत्तर
दशहरा (विजयदशमी) पर शस्त्र पूजा (आयुध पूजा) की प्राचीन परम्परा है — विशेषकर क्षत्रिय और योद्धा वर्ग में।
विधि
- 1शस्त्र/आयुध (तलवार, भाला, धनुष, या आधुनिक सन्दर्भ में वाहन, औजार, मशीन) को स्वच्छ करें।
- 2लाल/पीला कपड़ा बिछाकर शस्त्र रखें।
- 3गणपति पूजन।
- 4शस्त्रों पर हल्दी, कुमकुम, चन्दन, अक्षत लगाएँ।
- 5पुष्प, माला चढ़ाएँ।
- 6धूप-दीप-नैवेद्य अर्पित करें।
- 7शस्त्र मंत्र: 'ॐ शस्त्रेभ्यो नमः' या 'ॐ विजयाय नमः'।
- 8भगवान राम / देवी दुर्गा का स्मरण।
दक्षिण भारत में (आयुध पूजा)
- ▸कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्र में अत्यन्त लोकप्रिय।
- ▸मैसूर दशहरा विश्वप्रसिद्ध।
- ▸पुस्तकों, वाद्ययंत्रों, औजारों, वाहनों की पूजा।
- ▸सरस्वती पूजा (ज्ञान के शस्त्र = पुस्तकें)।
आधुनिक अनुकूलन
आज शस्त्र पूजा = अपने कार्यक्षेत्र के उपकरणों की पूजा — कम्प्यूटर, पुस्तकें, कलम, वाहन, मशीन। भावना: जो उपकरण आजीविका और कर्तव्य में सहायक हैं, उनके प्रति कृतज्ञता।





