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पर्व📜 क्षत्रिय परम्परा, राजपूत/मराठा परम्परा, धर्मशास्त्र1 मिनट पठन

दशहरा पर शस्त्र पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

दशहरा शस्त्र पूजा: शस्त्र/आयुध स्वच्छ करें → लाल कपड़े पर रखें → हल्दी-कुमकुम-अक्षत → पुष्प-धूप-दीप → 'ॐ शस्त्रेभ्यो नमः'। दक्षिण भारत: आयुध पूजा — पुस्तकें, वाद्य, वाहन, औजार। आधुनिक: कार्य उपकरणों की पूजा = कृतज्ञता।

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विस्तृत उत्तर

दशहरा (विजयदशमी) पर शस्त्र पूजा (आयुध पूजा) की प्राचीन परम्परा है — विशेषकर क्षत्रिय और योद्धा वर्ग में।

विधि

  1. 1शस्त्र/आयुध (तलवार, भाला, धनुष, या आधुनिक सन्दर्भ में वाहन, औजार, मशीन) को स्वच्छ करें।
  2. 2लाल/पीला कपड़ा बिछाकर शस्त्र रखें।
  3. 3गणपति पूजन।
  4. 4शस्त्रों पर हल्दी, कुमकुम, चन्दन, अक्षत लगाएँ।
  5. 5पुष्प, माला चढ़ाएँ।
  6. 6धूप-दीप-नैवेद्य अर्पित करें।
  7. 7शस्त्र मंत्र: 'ॐ शस्त्रेभ्यो नमः' या 'ॐ विजयाय नमः'।
  8. 8भगवान राम / देवी दुर्गा का स्मरण।

दक्षिण भारत में (आयुध पूजा)

  • कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्र में अत्यन्त लोकप्रिय।
  • मैसूर दशहरा विश्वप्रसिद्ध।
  • पुस्तकों, वाद्ययंत्रों, औजारों, वाहनों की पूजा।
  • सरस्वती पूजा (ज्ञान के शस्त्र = पुस्तकें)।

आधुनिक अनुकूलन

आज शस्त्र पूजा = अपने कार्यक्षेत्र के उपकरणों की पूजा — कम्प्यूटर, पुस्तकें, कलम, वाहन, मशीन। भावना: जो उपकरण आजीविका और कर्तव्य में सहायक हैं, उनके प्रति कृतज्ञता।

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शास्त्रीय स्रोत
क्षत्रिय परम्परा, राजपूत/मराठा परम्परा, धर्मशास्त्र
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