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पर्व📜 महाभारत (विराट पर्व), पुराण, लोक परम्परा1 मिनट पठन

दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा का पौराणिक कारण क्या है

संक्षिप्त उत्तर

शमी पूजा कारण: महाभारत — पाण्डवों ने शमी पर शस्त्र छिपाए, विजयदशमी को उतारे → विजय। 'शमी शमयते पापम्' = पापनाशक। शमी पत्ते='सोना' भेंट। अग्नि निवास (अरणि)। शनि वृक्ष। महाराष्ट्र/दक्षिण में अत्यन्त प्रचलित।

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विस्तृत उत्तर

दशहरा (विजयदशमी) पर शमी पूजा का मुख्य पौराणिक कारण महाभारत से है।

1. महाभारत (प्रमुख कथा): पाण्डवों ने 12 वर्ष वनवास + 1 वर्ष अज्ञातवास के दौरान अपने दिव्य शस्त्र (गाण्डीव धनुष आदि) शमी वृक्ष पर छिपाए। अज्ञातवास पूर्ण होने पर विजयदशमी को शस्त्र उतारे और कौरवों पर विजय प्राप्त की। तभी से शमी = विजय का प्रतीक।

2. शमी = अग्नि का वास: वैदिक परम्परा: शमी वृक्ष में अग्नि निवास करती है (अरणि मंथन)। 'शमी शमयते पापम्' = शमी पापों का शमन करती है।

3. श्लोक: 'शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥' — शमी पापनाशक, शत्रुनाशक, अर्जुन के धनुष की रक्षक, राम को प्रिय।

4. सोने का आदान-प्रदान: शमी पत्ते = 'सोना' मानकर बड़ों को भेंट = आशीर्वाद। महाराष्ट्र/दक्षिण भारत में अत्यन्त प्रचलित।

5. शनि सम्बन्ध: शमी = शनि देव का वृक्ष। शनिवार शमी पूजा = शनि शान्ति।

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शास्त्रीय स्रोत
महाभारत (विराट पर्व), पुराण, लोक परम्परा
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