विस्तृत उत्तर
दशहरा पर शमी वृक्ष की पूजा और शमी के पत्ते 'सोना' (स्वर्ण) के रूप में बाँटने की प्राचीन परम्परा है।
महत्व
1महाभारत सम्बन्ध
पाण्डवों ने 12 वर्ष वनवास और 1 वर्ष अज्ञातवास के दौरान अपने दिव्य अस्त्र-शस्त्र शमी वृक्ष पर छिपाए थे। अज्ञातवास समाप्त होने पर विजयदशमी के दिन उन्होंने शमी वृक्ष से अपने शस्त्र उतारे और विजय प्राप्त की।
2शमी = स्वर्ण वृक्ष
शमी के पत्तों को 'सोना' मानकर एक-दूसरे को देने और लेने की परम्परा है — 'शमी शमयते पापम्' (शमी पापों का शमन करती है)।
3अग्नि का वास
वैदिक परम्परा में शमी वृक्ष में अग्नि का वास माना गया है। अरणि मंथन (अग्नि उत्पन्न करने) में शमी की लकड़ी प्रयुक्त होती थी।
4शनि शान्ति
शमी शनि देव से भी जुड़ी है — शनिवार को शमी पूजा शनि शान्ति का उपाय।
पूजा विधि
- ▸शमी वृक्ष के नीचे जाकर जल, अक्षत, पुष्प, धूप-दीप चढ़ाएँ।
- ▸'शमी शमयते पापं शमी शत्रुविनाशिनी। अर्जुनस्य धनुर्धारी रामस्य प्रियदर्शिनी॥' — यह श्लोक पढ़ें।
- ▸शमी पत्ते तोड़कर 'सोना' (स्वर्ण) मानकर बड़ों को भेंट करें — आशीर्वाद लें।
- ▸यह परम्परा महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में अत्यन्त प्रचलित है।





