विस्तृत उत्तर
अक्षय तृतीया (वैशाख शुक्ल तृतीया) को 'साढ़े तीन शुभ मुहूर्तों' में गिना जाता है और यह शुभ कार्यों हेतु सर्वोत्तम है।
क्यों सर्वोत्तम
1स्वयंसिद्ध मुहूर्त
इस दिन कोई भी शुभ कार्य करने के लिए अलग से मुहूर्त निकालने की आवश्यकता नहीं — सम्पूर्ण दिन ही शुभ। 'अक्षय' = कभी क्षीण न हो। इस दिन किया गया कोई भी शुभ कर्म अनन्त फल देता है।
2साढ़े तीन शुभ मुहूर्त
हिन्दू पंचांग में 'अबूझ' (बिना विचार के शुभ) मुहूर्त — अक्षय तृतीया, विजयदशमी, गुड़ी पड़वा/उगादी, और देवउठनी एकादशी (आधा)।
3त्रेतायुग आरम्भ
इसी दिन त्रेतायुग की शुरुआत हुई — सर्वशुभ काल।
4पौराणिक घटनाएँ
- ▸परशुराम जन्म।
- ▸सुदामा-कृष्ण भेंट (दरिद्रता नाश)।
- ▸व्यास जी ने महाभारत लिखना आरम्भ।
- ▸गंगावतरण (कुछ परम्पराओं में)।
- ▸कुबेर को धनपति पद प्राप्त।
5ज्योतिषीय कारण
इस दिन सूर्य और चन्द्रमा दोनों उच्च राशि में होते हैं — सूर्य मेष (उच्च), चन्द्र वृषभ (उच्च)। दोनों लूमिनरीज (प्रकाशक ग्रह) उच्च = अत्यन्त शुभ।
6दान का अक्षय फल
इस दिन दिया गया दान कभी समाप्त नहीं होता — इसीलिए स्वर्ण खरीद, दान, अन्नदान विशेष प्रचलित।

