विस्तृत उत्तर
शरद पूर्णिमा (आश्विन शुक्ल पूर्णिमा) की रात चन्द्रमा की किरणों का विशेष प्रभाव शास्त्रीय, आयुर्वेदिक और वैज्ञानिक तीनों दृष्टियों से मान्य है।
शास्त्रीय प्रभाव
1सोलह कलाओं से पूर्ण चन्द्रमा
भारतीय मनीषियों के अनुसार केवल इसी पूर्णिमा को चन्द्रमा अपनी समस्त 16 कलाओं (अमृत, मनदा, पुष्प, पुष्टि, तुष्टि, धृति, शाशनी, चन्द्रिका, कांति, ज्योत्सना, श्री, प्रीति, अंगदा, पूर्ण, पूर्णामृत, प्रतिपदा) से संयुक्त होता है। अन्य पूर्णिमाओं में सभी 16 कलाएँ सक्रिय नहीं होतीं।
2अमृत वर्षा
इस रात चन्द्रमा से अमृत की वर्षा होती है — गीता (15.13) में श्रीकृष्ण कहते हैं: 'पुष्णामि चौषधीः सर्वाः सोमो भूत्वा रसात्मकः' — मैं रसस्वरूप अमृतमय चन्द्रमा होकर सम्पूर्ण औषधियों/वनस्पतियों को पुष्ट करता हूँ।
आयुर्वेदिक प्रभाव
3पित्त शमन
वर्षा ऋतु में संचित पित्त शरद ऋतु में प्रकुपित होता है। चन्द्रमा शीतल है — उसकी किरणें पित्त शामक। इसीलिए शीतल खीर चाँदनी में रखकर खाने का विधान।
4औषधि निर्माण
प्राचीन आयुर्वेदाचार्य इसी रात विभिन्न जड़ी-बूटियों से जीवनदायी औषधियाँ बनाते थे। काशी के गढ़वाघाट मठ से आज भी अस्थमा औषधि चन्द्रकिरणों में तैयार कर वितरित की जाती है।
5दूध-चावल (खीर) पर प्रभाव
BHU वैज्ञानिकों के शोध अनुसार दूध में लैक्टिक अम्ल और चावल में स्टार्च — दोनों चन्द्रकिरणों की शक्ति अधिक मात्रा में अवशोषित करते हैं। (यह शोध सीमित है, सार्वभौमिक वैज्ञानिक सहमति अभी पूर्ण नहीं।)
वैज्ञानिक दृष्टिकोण
- ▸शरद पूर्णिमा पर चन्द्रमा पृथ्वी के अत्यन्त निकट (पेरिजी) होता है — किरणें अधिक तीव्र।
- ▸शरद ऋतु में वातावरण स्वच्छ, प्रदूषण न्यून — किरणें पूर्ण शक्ति से पृथ्वी तक।
- ▸चन्द्र गुरुत्वाकर्षण शरीर में जल तत्व को प्रभावित करता है (ज्वार-भाटा सिद्धान्त)।
- ▸मेलाटोनिन हार्मोन प्रभावित — नींद चक्र और मानसिक शान्ति।
स्वास्थ्य लाभ (परम्परागत मान्यता)
- ▸अस्थमा/श्वसन रोग में लाभ।
- ▸नेत्र ज्योति वृद्धि (दशहरा से शरद पूर्णिमा तक चन्द्र निहारने से)।
- ▸चर्मरोग में लाभ।
- ▸रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि।
- ▸मानसिक शान्ति और ऊर्जा।





