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पर्व📜 भागवत पुराण (10वाँ स्कन्ध), विष्णु पुराण2 मिनट पठन

गोवर्धन पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।

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विस्तृत उत्तर

गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन) को मनाई जाती है।

विधि

  1. 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र।
  2. 2गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ — लेटे हुए पुरुष (गिरिराज) के रूप में। नाभि पर कटोरा रखें।
  3. 3गोवर्धन जी को पुष्प, अक्षत, चन्दन, धूप-दीप से पूजें।
  4. 4अन्नकूट = 56 भोग (छप्पन भोग) या यथाशक्ति विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें।
  5. 5नाभि के कटोरे में दूध/दही डालें।
  6. 6गोवर्धन जी की परिक्रमा करें।
  7. 7'श्री गिरिराज धरण जय जय' — स्तुति।
  8. 8गाय की पूजा — गाय को चारा, रोटी, गुड़ खिलाएँ।

कथा (भागवत पुराण)

भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा — क्योंकि गोवर्धन गायों को चारा और जल देता है। इन्द्र ने कुपित होकर भयंकर वर्षा की, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठिका (छोटी उँगली) पर उठाकर 7 दिन तक ब्रजवासियों की रक्षा की।

भावना: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, गौ सेवा, अहंकार (इन्द्र) पर भक्ति (कृष्ण) की विजय।

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शास्त्रीय स्रोत
भागवत पुराण (10वाँ स्कन्ध), विष्णु पुराण
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