विस्तृत उत्तर
गोवर्धन पूजा कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा (दीपावली के अगले दिन) को मनाई जाती है।
विधि
- 1प्रातः स्नान → शुद्ध वस्त्र।
- 2गोबर से गोवर्धन पर्वत की आकृति बनाएँ — लेटे हुए पुरुष (गिरिराज) के रूप में। नाभि पर कटोरा रखें।
- 3गोवर्धन जी को पुष्प, अक्षत, चन्दन, धूप-दीप से पूजें।
- 4अन्नकूट = 56 भोग (छप्पन भोग) या यथाशक्ति विभिन्न प्रकार के व्यंजन बनाकर भगवान को अर्पित करें।
- 5नाभि के कटोरे में दूध/दही डालें।
- 6गोवर्धन जी की परिक्रमा करें।
- 7'श्री गिरिराज धरण जय जय' — स्तुति।
- 8गाय की पूजा — गाय को चारा, रोटी, गुड़ खिलाएँ।
कथा (भागवत पुराण)
भगवान कृष्ण ने ब्रजवासियों को इन्द्र के बजाय गोवर्धन पर्वत की पूजा करने को कहा — क्योंकि गोवर्धन गायों को चारा और जल देता है। इन्द्र ने कुपित होकर भयंकर वर्षा की, तब कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को कनिष्ठिका (छोटी उँगली) पर उठाकर 7 दिन तक ब्रजवासियों की रक्षा की।
भावना: प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, गौ सेवा, अहंकार (इन्द्र) पर भक्ति (कृष्ण) की विजय।





