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कार्तिक — प्रश्नोत्तरी

शास्त्रों और पुराणों पर आधारित प्रामाणिक प्रश्न-उत्तर — कुल 8 प्रश्न

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मंदिर उत्सव

मंदिर में तुलसी विवाह के दिन विशेष सजावट क्यों करते हैं?

तुलसी+शालिग्राम विवाह (कार्तिक एकादशी)। विष्णु जागे (देवउठनी), मंगल कार्य आरंभ, तुलसी=लक्ष्मी, विवाह=सजावट। मंडप/फूल/गन्ना। कराना=पुत्री विवाह समान पुण्य।

तुलसी विवाहसजावटक्यों
पर्व

भैया दूज पर बहन तिलक कैसे लगाए

भैया दूज तिलक: बहन स्नान → चौकी पर लाल कपड़ा → भाई बिठाएँ → अनामिका से रोली तिलक (भ्रूमध्य) + अक्षत → आरती → मिठाई → दक्षिणा। कथा: यमुना ने यमराज को तिलक → अकाल मृत्यु भय नाश।

भैया दूजतिलकबहन
त्योहार पूजा

भैया दूज पर यमराज की पूजा क्यों करते हैं?

भैया दूज यमराज: यम-यमुना कथा (बहन ने भोजन कराया→यम ने वर='अकाल मृत्यु नहीं'), यम=मृत्यु देवता (भाई रक्षा), यमुना स्नान=यम भय मुक्ति। बहन→तिलक→भोजन→दक्षिणा। रक्षाबंधन पूरक।

भैया दूजयमराजयमुना
पर्व

तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

तुलसी विवाहप्रबोधिनी एकादशीशालग्राम
पर्व

गोवर्धन पूजा कैसे करें

गोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।

गोवर्धनअन्नकूटकृष्ण
पर्व

भैया दूज पर पूजा कैसे करें

भैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।

भैया दूजयम द्वितीयाभाई-बहन
व्रत एवं पर्व

कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान है

कार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।

कार्तिकस्नानदीपदान
पूजा विधि

तुलसी विवाह की विधि और मंत्र क्या हैं?

तुलसी विवाह मंत्र: गणेश पूजन (ॐ गं गणपतये नमः) → तुलसी पूजन (ॐ तुलस्यै नमः + महाप्रसाद जननी...) → शालिग्राम (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) → कन्यादान मंत्र → सात फेरे → मौली बन्धन → आरती → भोग। शालिग्राम पर चावल नहीं, तिल चढ़ाएँ।

तुलसी विवाहमंत्रशालिग्राम

सनातन धर्म प्रश्नोत्तरी — शास्त्रीय ज्ञान

पौराणिक प्रश्नोत्तरी पर आपको हिंदू धर्म, वेद, पुराण, भगवद गीता, रामायण, महाभारत, पूजा विधि, व्रत-त्योहार, मंत्र, देवी-देवताओं और सनातन संस्कृति से जुड़े सैकड़ों प्रश्नों के प्रामाणिक उत्तर मिलेंगे। प्रत्येक उत्तर शास्त्रों और प्राचीन ग्रंथों पर आधारित है। किसी भी प्रश्न पर क्लिक करें और विस्तृत, प्रमाणित उत्तर पढ़ें।