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पर्व📜 पुराण, लोक परम्परा, भैया दूज कथा2 मिनट पठन

भैया दूज पर पूजा कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

भैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।

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विस्तृत उत्तर

भैया दूज (यम द्वितीया) कार्तिक शुक्ल द्वितीया को मनाई जाती है — दीपावली के दो दिन बाद।

पूजा विधि

  1. 1बहन प्रातः स्नान करके पूजा स्थल तैयार करे।
  2. 2चौकी पर रंगोली/स्वस्तिक बनाएँ।
  3. 3भाई को आसन पर बिठाएँ।
  4. 4भाई के माथे पर तिलक (रोली-चावल) लगाएँ।
  5. 5भाई की आरती उतारें।
  6. 6भाई को मिठाई/नारियल/फल दें।
  7. 7भाई बहन को उपहार/दक्षिणा दे।
  8. 8बहन भाई के लिए दीर्घायु और सुख की कामना करे।

विशेष परम्परा

  • बहन भाई को हाथ से बना भोजन खिलाए।
  • कुछ स्थानों पर भाई की हथेली पर बहन तेल + सिन्दूर लगाती है।

कथा

यमराज अपनी बहन यमुना से मिलने उनके घर गए। यमुना ने उनका तिलक कर आदर-सत्कार किया। यमराज ने प्रसन्न होकर वरदान दिया कि जो भाई इस दिन बहन से तिलक करवाएगा, उसे यम का भय नहीं होगा। इसीलिए इसे 'यम द्वितीया' भी कहते हैं।

भावना: भाई-बहन के पवित्र स्नेह बन्धन का पर्व।

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शास्त्रीय स्रोत
पुराण, लोक परम्परा, भैया दूज कथा
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