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पर्व📜 पुराण, यम-यमुना कथा, लोक परम्परा1 मिनट पठन

भैया दूज पर बहन तिलक कैसे लगाए

संक्षिप्त उत्तर

भैया दूज तिलक: बहन स्नान → चौकी पर लाल कपड़ा → भाई बिठाएँ → अनामिका से रोली तिलक (भ्रूमध्य) + अक्षत → आरती → मिठाई → दक्षिणा। कथा: यमुना ने यमराज को तिलक → अकाल मृत्यु भय नाश।

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विस्तृत उत्तर

भैया दूज (कार्तिक शुक्ल द्वितीया) पर बहन द्वारा भाई को तिलक लगाने की विधि:

विधि

  1. 1बहन प्रातः स्नान → शुद्ध/नए वस्त्र। भाई भी स्नान करके आए।
  2. 2चौकी/पटले पर लाल कपड़ा बिछाएँ। रंगोली/स्वस्तिक बनाएँ।
  3. 3भाई को आसन पर बिठाएँ।
  4. 4तिलक सामग्री: रोली (लाल कुमकुम) + अक्षत (चावल) + चन्दन (कुछ परम्पराओं में)।
  5. 5तिलक: बहन दाहिने हाथ की अनामिका से भाई के माथे (भ्रूमध्य) पर रोली का तिलक लगाए। ऊपर अक्षत (चावल) चिपकाए।
  6. 6भाई की आरती उतारे (दीपक से)।
  7. 7भाई को मिठाई/नारियल/फल खिलाए।
  8. 8भाई की दीर्घायु, सुख-समृद्धि की कामना।
  9. 9भाई बहन को उपहार/दक्षिणा दे।

कुछ क्षेत्रीय परम्पराएँ: बहन भाई की हथेली पर तेल + सिन्दूर लगाती है। कुछ स्थानों पर काजल भी लगाती है।

कथा: यमुना ने भाई यमराज का तिलक किया → यम प्रसन्न → वरदान: जो भाई बहन से तिलक करवाए, उसे अकाल मृत्यु का भय नहीं।

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शास्त्रीय स्रोत
पुराण, यम-यमुना कथा, लोक परम्परा
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