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पर्व📜 पद्म पुराण, स्कन्द पुराण, वैष्णव परम्परा2 मिनट पठन

तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

संक्षिप्त उत्तर

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

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विस्तृत उत्तर

तुलसी विवाह देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शुभ दिन किया जाता है। अधिकांशतः एकादशी या द्वादशी को।

विधि

  1. 1तुलसी के पौधे को सजाएँ — साड़ी/लाल कपड़ा पहनाएँ, श्रृंगार (सिन्दूर, मेहंदी, बिन्दी, चूड़ी)।
  2. 2शालग्राम (विष्णु का प्रतीक) को भी सजाएँ — धोती, मुकुट।
  3. 3विवाह मण्डप बनाएँ — तुलसी के चारों ओर गन्ने की टहनियाँ, आम के पत्ते, फूलों की माला।
  4. 4विवाह विधि:
  • गणपति पूजन।
  • कन्यादान (तुलसी = कन्या, शालग्राम = वर)।
  • मंत्रोच्चार के साथ तुलसी और शालग्राम को एक-दूसरे के सम्मुख रखें।
  • सूत/मौली से बाँधें (गठबन्धन)।
  • अग्नि के चारों ओर सात फेरे (प्रतीकात्मक — दीपक के चारों ओर)।
  1. 1आरती उतारें।
  2. 2प्रसाद वितरण — पंचामृत, फल, मिठाई।
  3. 3गन्ना, आँवला, चेरी (बेर) अर्पित।

महत्व

  • इसी दिन से विवाह का मौसम आरम्भ — चातुर्मास समाप्त।
  • तुलसी = लक्ष्मी/वृन्दा, शालग्राम = विष्णु — दोनों का दिव्य विवाह।
  • पद्म पुराण: तुलसी विवाह करने वाले को कन्यादान का पुण्य।
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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, स्कन्द पुराण, वैष्णव परम्परा
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