विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह देवउठनी (प्रबोधिनी) एकादशी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) से कार्तिक पूर्णिमा तक किसी भी शुभ दिन किया जाता है। अधिकांशतः एकादशी या द्वादशी को।
विधि
- 1तुलसी के पौधे को सजाएँ — साड़ी/लाल कपड़ा पहनाएँ, श्रृंगार (सिन्दूर, मेहंदी, बिन्दी, चूड़ी)।
- 2शालग्राम (विष्णु का प्रतीक) को भी सजाएँ — धोती, मुकुट।
- 3विवाह मण्डप बनाएँ — तुलसी के चारों ओर गन्ने की टहनियाँ, आम के पत्ते, फूलों की माला।
- 4विवाह विधि:
- ▸गणपति पूजन।
- ▸कन्यादान (तुलसी = कन्या, शालग्राम = वर)।
- ▸मंत्रोच्चार के साथ तुलसी और शालग्राम को एक-दूसरे के सम्मुख रखें।
- ▸सूत/मौली से बाँधें (गठबन्धन)।
- ▸अग्नि के चारों ओर सात फेरे (प्रतीकात्मक — दीपक के चारों ओर)।
- 1आरती उतारें।
- 2प्रसाद वितरण — पंचामृत, फल, मिठाई।
- 3गन्ना, आँवला, चेरी (बेर) अर्पित।
महत्व
- ▸इसी दिन से विवाह का मौसम आरम्भ — चातुर्मास समाप्त।
- ▸तुलसी = लक्ष्मी/वृन्दा, शालग्राम = विष्णु — दोनों का दिव्य विवाह।
- ▸पद्म पुराण: तुलसी विवाह करने वाले को कन्यादान का पुण्य।





