विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी) या द्वादशी पर माता तुलसी का भगवान शालिग्राम से विवाह कराने का पवित्र अनुष्ठान है।
विस्तृत विधि और मंत्र
1सज्जा
- ▸तुलसी को गंगाजल से स्नान, हल्दी-केसर-चन्दन से श्रृंगार, चुनरी ओढ़ाएँ, 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करें।
- ▸शालिग्राम को गंगाजल स्नान, तुलसी पत्र-पुष्प से सजाएँ, पीले वस्त्र।
- ▸गन्ने/फूलों से मण्डप, रंगोली, आम-केले के पत्ते।
2. कलश स्थापना: जल भरा कलश, आम पत्ते, नारियल सहित स्थापित करें।
3. गणेश पूजन मंत्र: 'ॐ गं गणपतये नमः।'
4. तुलसी पूजन मंत्र: 'ॐ तुलस्यै नमः।' 'महाप्रसाद जननी सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं तुलसी त्वं नमोऽस्तु ते।'
5. शालिग्राम पूजन मंत्र: 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।' विष्णु सहस्रनाम के श्लोक।
6. कन्यादान (तुलसी का): सामान्य विवाह की भाँति तुलसी माता का कन्यादान। मंत्र: 'कन्यां कनकसम्पन्नां कनकाभरणैर्युताम्। दासयामि विष्णवे तुभ्यं ब्रह्मलोकजिगीषया।'
7. सात फेरे: शालिग्राम को तुलसी के गमले के चारों ओर 7 बार घुमाएँ। सप्तपदी मंत्रों का उच्चारण।
8. मौली बन्धन: तुलसी और शालिग्राम के बीच मौली (रक्षासूत्र) बाँधें।
9. आरती: 'ॐ जय जगदीश हरे...' या 'ॐ जय तुलसी माता...' आरती।
10. भोग और प्रसाद: मिठाई, फल, पान, पंचामृत का भोग। प्रसाद वितरण।
विशेष मंत्र — विवाह संपन्नता: 'तुलसी श्रीसखी शुभे पापहारिणि पुण्यदे। नमस्ते नारदनुते नारायणमनःप्रिये।'
नियम: शालिग्राम पर चावल न चढ़ाएँ — तिल चढ़ाएँ। तामसिक भोजन वर्जित। विवाह के बाद दान अवश्य करें।





