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तुलसी विवाह से जुड़े सभी प्रश्न(11)

तुलसी विवाह पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 11 प्रश्न उपलब्ध हैं।

विष्णु उपासना

विष्णु जी को तुलसी क्यों चढ़ाते हैं?

पुराणों के अनुसार भगवान विष्णु ने वृंदा (तुलसी के पूर्वजन्म) को वरदान दिया था कि वे बिना तुलसी के कोई भोग स्वीकार नहीं करेंगे। वृंदा के पतिव्रत-बल से तुलसी का जन्म हुआ और विष्णु जी ने उसे लक्ष्मी के समान 'विष्णुप्रिया' कहा। इसीलिए विष्णु पूजा में तुलसी अनिवार्य है।

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मंदिर उत्सव

मंदिर में तुलसी विवाह के दिन विशेष सजावट क्यों करते हैं?

तुलसी+शालिग्राम विवाह (कार्तिक एकादशी)। विष्णु जागे (देवउठनी), मंगल कार्य आरंभ, तुलसी=लक्ष्मी, विवाह=सजावट। मंडप/फूल/गन्ना। कराना=पुत्री विवाह समान पुण्य।

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लोक

तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

तुलसी विवाह तुलसी यानी वृंदा और शालिग्राम विष्णु के दिव्य मिलन की स्मृति है।

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तुलसी विवाह परिचय

तुलसी विवाह क्यों किया जाता है?

तुलसी विवाह = जीवात्मा (तुलसी/भक्त) का परमात्मा (शालिग्राम/विष्णु) के साथ शाश्वत आध्यात्मिक मिलन। सती वृंदा के वरदान की स्मृति में प्रतिवर्ष कार्तिक शुक्ल एकादशी को संपन्न होता है। यह भक्ति, पवित्रता और समर्पण का प्रतीक है।

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पर्व एवं त्योहार

तुलसी विवाह कब और कैसे होता है?

तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल एकादशी (देवउठनी एकादशी) को होता है। इस दिन तुलसी का गन्ने के मंडप में श्रृंगार कर, शालिग्राम शिला से विधिपूर्वक विवाह संपन्न कराया जाता है। इसका पुण्य कन्यादान के समान माना गया है।

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त्योहार पूजा

तुलसी विवाह के बाद शादी विवाह शुरू होने का क्या कारण है?

तुलसी विवाह बाद शादी: विष्णु जागरण (दैवी आशीर्वाद उपलब्ध), चातुर्मास समाप्ति (4 माह वर्जन हटा), प्रथम दैवी विवाह (तुलसी+शालिग्राम), ऋतु अनुकूल (यात्रा सुगम), शुभ मुहूर्त प्रचुर (मार्गशीर्ष-माघ)।

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व्रत विधि

प्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?

प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।

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पर्व

तुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करें

तुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।

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पूजा विधि

तुलसी विवाह की विधि और मंत्र क्या हैं?

तुलसी विवाह मंत्र: गणेश पूजन (ॐ गं गणपतये नमः) → तुलसी पूजन (ॐ तुलस्यै नमः + महाप्रसाद जननी...) → शालिग्राम (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) → कन्यादान मंत्र → सात फेरे → मौली बन्धन → आरती → भोग। शालिग्राम पर चावल नहीं, तिल चढ़ाएँ।

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पूजा विधि

तुलसी विवाह कब और कैसे करें?

तुलसी विवाह: कार्तिक शुक्ल द्वादशी (देवउठनी एकादशी भी)। विधि: तुलसी-शालिग्राम स्नान-श्रृंगार → मण्डप → कन्यादान → सात फेरे → 'ॐ तुलस्यै नमः' जाप → आरती-भोग → दान। विवाह मुहूर्तों की शुरुआत। कन्यादान तुल्य पुण्य।

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मंदिर वास्तु

मंदिर में तुलसी का पौधा क्यों होता है?

धार्मिक: विष्णुप्रिया — विष्णु पूजा अपूर्ण बिना तुलसी। वृन्दा = देवी रूप। कार्तिक में तुलसी विवाह। नकारात्मक शक्ति निवारक। वैज्ञानिक: Air Purifier, जीवाणु नाशक, मच्छर निवारक, औषधीय। चौकोर चबूतरे पर स्थापना। शिवलिंग पर वर्जित। रविवार/एकादशी पत्ते न तोड़ें।

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