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व्रत विधि📜 पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण2 मिनट पठन

प्रबोधिनी एकादशी पर विष्णु जागरण कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

प्रबोधिनी एकादशी: कार्तिक शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं। विधि: शंख-घण्टा से जगाएँ → 'उत्तिष्ठ गोविन्द...' मंत्र → षोडशोपचार → तुलसी विवाह → रात्रि जागरण → गन्ना-आँवला भोग। चातुर्मास समाप्ति, विवाह मुहूर्त आरम्भ।

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विस्तृत उत्तर

प्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी एकादशी) कार्तिक शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं।

विशेष महत्व

  • चातुर्मास समाप्ति — शुभ कार्यों (विवाह आदि) का पुनः आरम्भ।
  • तुलसी विवाह इसी दिन या अगले दिन (द्वादशी) को होता है।
  • यह एकादशी 'महा एकादशी' भी कहलाती है।

विष्णु जागरण विधि

  1. 1प्रातः स्नान-संकल्प: 'प्रबोधिन्यां व्रतं कृत्वा विष्णुं प्रबोधयामि।'
  1. 1विष्णु जागरण:
  • भगवान विष्णु की शयन मुद्रा वाली प्रतिमा को उठाकर बैठाएँ/खड़ा करें।
  • शंख ध्वनि, घण्टानाद, मंत्रोच्चार से विष्णु को जगाएँ।
  • मंत्र: 'उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तमिदं भवेत्।' (हे गोविन्द! उठिए, निद्रा त्यागिए।)
  1. 1षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, नये वस्त्र, आभूषण, तुलसी, पुष्प। विशेष भोग — खीर, मिठाई, फल।
  1. 1तुलसी विवाह: इसी दिन या द्वादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह।
  1. 1रात्रि जागरण: इस रात जागरण अत्यंत पुण्यदायी। भजन-कीर्तन, विष्णु कथा।
  1. 1दान: गन्ना, आँवला, फल, वस्त्र, अन्नदान।

विशेष: प्रबोधिनी एकादशी पर गन्ने का विशेष महत्व है — भगवान को गन्ने का भोग लगाएँ। इस दिन से विवाह मुहूर्त आरम्भ हो जाते हैं।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, विष्णु पुराण, स्कन्द पुराण
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