विस्तृत उत्तर
प्रबोधिनी एकादशी (देवउठनी एकादशी) कार्तिक शुक्ल एकादशी को मनाई जाती है। इस दिन भगवान विष्णु चार माह की योगनिद्रा से जागते हैं।
विशेष महत्व
- ▸चातुर्मास समाप्ति — शुभ कार्यों (विवाह आदि) का पुनः आरम्भ।
- ▸तुलसी विवाह इसी दिन या अगले दिन (द्वादशी) को होता है।
- ▸यह एकादशी 'महा एकादशी' भी कहलाती है।
विष्णु जागरण विधि
- 1प्रातः स्नान-संकल्प: 'प्रबोधिन्यां व्रतं कृत्वा विष्णुं प्रबोधयामि।'
- 1विष्णु जागरण:
- ▸भगवान विष्णु की शयन मुद्रा वाली प्रतिमा को उठाकर बैठाएँ/खड़ा करें।
- ▸शंख ध्वनि, घण्टानाद, मंत्रोच्चार से विष्णु को जगाएँ।
- ▸मंत्र: 'उत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत् सुप्तमिदं भवेत्।' (हे गोविन्द! उठिए, निद्रा त्यागिए।)
- 1षोडशोपचार पूजन: पंचामृत अभिषेक, नये वस्त्र, आभूषण, तुलसी, पुष्प। विशेष भोग — खीर, मिठाई, फल।
- 1तुलसी विवाह: इसी दिन या द्वादशी को तुलसी-शालिग्राम विवाह।
- 1रात्रि जागरण: इस रात जागरण अत्यंत पुण्यदायी। भजन-कीर्तन, विष्णु कथा।
- 1दान: गन्ना, आँवला, फल, वस्त्र, अन्नदान।
विशेष: प्रबोधिनी एकादशी पर गन्ने का विशेष महत्व है — भगवान को गन्ने का भोग लगाएँ। इस दिन से विवाह मुहूर्त आरम्भ हो जाते हैं।





