मंदिर उत्सवमंदिर में तुलसी विवाह के दिन विशेष सजावट क्यों करते हैं?तुलसी+शालिग्राम विवाह (कार्तिक एकादशी)। विष्णु जागे (देवउठनी), मंगल कार्य आरंभ, तुलसी=लक्ष्मी, विवाह=सजावट। मंडप/फूल/गन्ना। कराना=पुत्री विवाह समान पुण्य।#तुलसी विवाह#सजावट#क्यों
श्रीमद्भागवतभागवत कथा के शुभ महीने कौन से हैं?भाद्रपद, आश्विन, कार्तिक, मार्गशीर्ष, आषाढ़ और श्रावण कथा आरंभ के शुभ महीने बताए गए हैं।#भागवत कथा#शुभ महीने#श्रावण
लोकतुलसी विवाह कब होता है?तुलसी विवाह कार्तिक शुक्ल देवोत्थान एकादशी या उसके आसपास किया जाता है।#तुलसी विवाह तिथि#देवोत्थान एकादशी#कार्तिक
पर्वभैया दूज पर बहन तिलक कैसे लगाएभैया दूज तिलक: बहन स्नान → चौकी पर लाल कपड़ा → भाई बिठाएँ → अनामिका से रोली तिलक (भ्रूमध्य) + अक्षत → आरती → मिठाई → दक्षिणा। कथा: यमुना ने यमराज को तिलक → अकाल मृत्यु भय नाश।#भैया दूज#तिलक#बहन
त्योहार पूजाभैया दूज पर यमराज की पूजा क्यों करते हैं?भैया दूज यमराज: यम-यमुना कथा (बहन ने भोजन कराया→यम ने वर='अकाल मृत्यु नहीं'), यम=मृत्यु देवता (भाई रक्षा), यमुना स्नान=यम भय मुक्ति। बहन→तिलक→भोजन→दक्षिणा। रक्षाबंधन पूरक।#भैया दूज#यमराज#यमुना
पर्वतुलसी विवाह प्रबोधिनी एकादशी पर कैसे करेंतुलसी विवाह: देवउठनी एकादशी (कार्तिक शुक्ल)। तुलसी = कन्या (साड़ी, श्रृंगार), शालग्राम = वर। विवाह: गणपति पूजन → कन्यादान → गठबन्धन → 7 फेरे (दीपक चारों ओर) → आरती। गन्ना-आँवला अर्पित। इससे विवाह मौसम आरम्भ। कन्यादान पुण्य।#तुलसी विवाह#प्रबोधिनी एकादशी#शालग्राम
पर्वगोवर्धन पूजा कैसे करेंगोवर्धन पूजा: कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा। गोबर से गोवर्धन आकृति → पूजा → अन्नकूट (छप्पन भोग) अर्पण → परिक्रमा → गाय पूजा। भागवत: कृष्ण ने गोवर्धन उठाकर ब्रज रक्षा की। भावना: प्रकृति कृतज्ञता, गौ सेवा।#गोवर्धन#अन्नकूट#कृष्ण
पर्वभैया दूज पर पूजा कैसे करेंभैया दूज: कार्तिक शुक्ल द्वितीया। बहन भाई को तिलक (रोली-चावल) → आरती → मिठाई/फल → भोजन खिलाए। भाई उपहार दे। कथा: यमुना ने यमराज का तिलक किया — वरदान: तिलक करवाने वाले को यमभय नहीं। भाई-बहन स्नेह बन्धन।#भैया दूज#यम द्वितीया#भाई-बहन
व्रत एवं पर्वकार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान हैकार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।#कार्तिक#स्नान#दीपदान
पूजा विधितुलसी विवाह की विधि और मंत्र क्या हैं?तुलसी विवाह मंत्र: गणेश पूजन (ॐ गं गणपतये नमः) → तुलसी पूजन (ॐ तुलस्यै नमः + महाप्रसाद जननी...) → शालिग्राम (ॐ नमो भगवते वासुदेवाय) → कन्यादान मंत्र → सात फेरे → मौली बन्धन → आरती → भोग। शालिग्राम पर चावल नहीं, तिल चढ़ाएँ।#तुलसी विवाह#मंत्र#शालिग्राम