विस्तृत उत्तर
तुलसी विवाह सामान्यतः कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष में देवोत्थान या प्रबोधिनी एकादशी से आरंभ होकर द्वादशी तक किया जाता है। कई स्थानों पर इसे एकादशी के दिन, तो कहीं द्वादशी के दिन संपन्न किया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु के जागरण की परंपरा भी मानी जाती है, इसलिए विवाह, मांगलिक कार्य और उत्सवों का आरंभ शुभ माना जाता है। तुलसी विवाह में तुलसी माता का विवाह शालिग्राम भगवान से कराया जाता है। यह अनुष्ठान वृंदा की कथा, विष्णु के शालिग्राम रूप और तुलसी के पूजन से सीधा जुड़ा हुआ है।
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