विस्तृत उत्तर
कार्तिक मास हिन्दू पंचांग का सबसे पवित्र मास माना गया है। पद्म पुराण में कार्तिक माहात्म्य का विस्तृत वर्णन है।
कार्तिक स्नान
- ▸सम्पूर्ण कार्तिक मास (विशेषकर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा) ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए।
- ▸नदी या पवित्र जलाशय में स्नान सर्वोत्तम, अन्यथा घर पर भी गंगाजल मिलाकर स्नान।
- ▸स्नान मंत्र: 'कार्तिके यः करोत्स्नानं प्रातरुत्थाय मानवः। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'
- ▸स्नान के बाद तुलसी पूजा और विष्णु आराधना।
दीपदान
- ▸कार्तिक मास में दीपदान (दीये जलाकर दान करना) का अत्यधिक महत्व है।
- ▸विशेषकर सन्ध्याकाल (सूर्यास्त के बाद) में।
- ▸तुलसी के पौधे के पास, पीपल/बरगद के नीचे, मन्दिर में, नदी तट पर दीपदान।
- ▸घी या तिल तेल के दीये — मिट्टी के दीयों का प्रयोग।
- ▸'दीपदानं करोत्यश्च कार्तिके हरिवासरे। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'
अन्य विधान
- ▸तुलसी पूजा प्रतिदिन — तुलसी में विष्णु का वास।
- ▸एकादशी व्रत।
- ▸कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर विशेष स्नान-दान।
- ▸दीपावली भी कार्तिक मास में ही आती है।
- ▸कार्तिक में दान का विशेष पुण्य — अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान।





