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व्रत एवं पर्व📜 पद्म पुराण (कार्तिक माहात्म्य), स्कन्द पुराण, विष्णु पुराण2 मिनट पठन

कार्तिक मास में स्नान और दीपदान का क्या विधान है

संक्षिप्त उत्तर

कार्तिक = सबसे पवित्र मास (पद्मपुराण)। स्नान: ब्रह्म मुहूर्त में नदी/घर पर, सर्वपापनाशक। दीपदान: सन्ध्याकाल में तुलसी/पीपल/मन्दिर/नदी तट पर — घी/तिल तेल के मिट्टी दीये। तुलसी पूजा नित्य। कार्तिक पूर्णिमा = देव दीपावली। दान का विशेष पुण्य।

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विस्तृत उत्तर

कार्तिक मास हिन्दू पंचांग का सबसे पवित्र मास माना गया है। पद्म पुराण में कार्तिक माहात्म्य का विस्तृत वर्णन है।

कार्तिक स्नान

  • सम्पूर्ण कार्तिक मास (विशेषकर कार्तिक शुक्ल प्रतिपदा से पूर्णिमा) ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए।
  • नदी या पवित्र जलाशय में स्नान सर्वोत्तम, अन्यथा घर पर भी गंगाजल मिलाकर स्नान।
  • स्नान मंत्र: 'कार्तिके यः करोत्स्नानं प्रातरुत्थाय मानवः। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'
  • स्नान के बाद तुलसी पूजा और विष्णु आराधना।

दीपदान

  • कार्तिक मास में दीपदान (दीये जलाकर दान करना) का अत्यधिक महत्व है।
  • विशेषकर सन्ध्याकाल (सूर्यास्त के बाद) में।
  • तुलसी के पौधे के पास, पीपल/बरगद के नीचे, मन्दिर में, नदी तट पर दीपदान।
  • घी या तिल तेल के दीये — मिट्टी के दीयों का प्रयोग।
  • 'दीपदानं करोत्यश्च कार्तिके हरिवासरे। सर्वपापविनिर्मुक्तो विष्णुलोकं स गच्छति॥'

अन्य विधान

  • तुलसी पूजा प्रतिदिन — तुलसी में विष्णु का वास।
  • एकादशी व्रत।
  • कार्तिक पूर्णिमा (देव दीपावली) पर विशेष स्नान-दान।
  • दीपावली भी कार्तिक मास में ही आती है।
  • कार्तिक में दान का विशेष पुण्य — अन्नदान, वस्त्रदान, गोदान।
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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण (कार्तिक माहात्म्य), स्कन्द पुराण, विष्णु पुराण
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