विस्तृत उत्तर
देवशयनी और देवउठनी एकादशी चातुर्मास के आरम्भ और समापन की तिथियाँ हैं।
देवशयनी एकादशी (हरिशयनी)
- ▸तिथि: आषाढ़ शुक्ल एकादशी (जून-जुलाई)।
- ▸अर्थ: इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार मास की योगनिद्रा में चले जाते हैं।
- ▸इसी दिन से चातुर्मास आरम्भ होता है।
- ▸मांगलिक कार्य (विवाह, गृहप्रवेश, मुण्डन आदि) बन्द हो जाते हैं।
- ▸भक्ति, तप, संयम, जप का काल आरम्भ।
देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी/देवोत्थान)
- ▸तिथि: कार्तिक शुक्ल एकादशी (अक्टूबर-नवम्बर)।
- ▸अर्थ: इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं।
- ▸चातुर्मास समाप्त होता है।
- ▸मांगलिक कार्य पुनः आरम्भ — विवाह का मौसम शुरू।
- ▸तुलसी विवाह इसी दिन किया जाता है।
- ▸पद्मपुराण: इस व्रत से 1000 अश्वमेध और 100 राजसूय यज्ञ का फल।
मुख्य अन्तर
- ▸देवशयनी = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द।
- ▸देवउठनी = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य आरम्भ।
- ▸दोनों के बीच ~4 मास का अन्तराल।





