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व्रत एवं पर्व📜 पद्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, स्कन्द पुराण2 मिनट पठन

देवशयनी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर है

संक्षिप्त उत्तर

देवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द। देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य + विवाह आरम्भ, तुलसी विवाह। ~4 मास अन्तराल। पद्मपुराण: देवउठनी = 1000 अश्वमेध फल।

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विस्तृत उत्तर

देवशयनी और देवउठनी एकादशी चातुर्मास के आरम्भ और समापन की तिथियाँ हैं।

देवशयनी एकादशी (हरिशयनी)

  • तिथि: आषाढ़ शुक्ल एकादशी (जून-जुलाई)।
  • अर्थ: इस दिन भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार मास की योगनिद्रा में चले जाते हैं।
  • इसी दिन से चातुर्मास आरम्भ होता है।
  • मांगलिक कार्य (विवाह, गृहप्रवेश, मुण्डन आदि) बन्द हो जाते हैं।
  • भक्ति, तप, संयम, जप का काल आरम्भ।

देवउठनी एकादशी (प्रबोधिनी/देवोत्थान)

  • तिथि: कार्तिक शुक्ल एकादशी (अक्टूबर-नवम्बर)।
  • अर्थ: इस दिन भगवान विष्णु योगनिद्रा से जागते हैं।
  • चातुर्मास समाप्त होता है।
  • मांगलिक कार्य पुनः आरम्भ — विवाह का मौसम शुरू।
  • तुलसी विवाह इसी दिन किया जाता है।
  • पद्मपुराण: इस व्रत से 1000 अश्वमेध और 100 राजसूय यज्ञ का फल।

मुख्य अन्तर

  • देवशयनी = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द।
  • देवउठनी = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य आरम्भ।
  • दोनों के बीच ~4 मास का अन्तराल।
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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, ब्रह्मवैवर्त पुराण, स्कन्द पुराण
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