विस्तृत उत्तर
राजा अम्बरीष की कथा भक्ति, विनम्रता और भगवान की भक्त-रक्षा का अद्भुत उदाहरण है। उन्होंने एक वर्ष तक एकादशी-द्वादशी व्रत किया और अंतिम पारण के समय दुर्वासा ऋषि अतिथि बनकर आए। दुर्वासा स्नान के लिए गए और देर हो गई, जबकि द्वादशी पारण का समय निकल रहा था। ब्राह्मणों की सलाह पर अम्बरीष ने केवल जल ग्रहण किया। लौटकर दुर्वासा क्रोधित हुए और कृत्या राक्षसी उत्पन्न की, लेकिन सुदर्शन चक्र ने उसे भस्म कर दिया और दुर्वासा का पीछा किया। अंत में दुर्वासा ने अम्बरीष से क्षमा माँगी और राजा ने उन्हें बचाया।
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