विस्तृत उत्तर
अम्बरीष की द्वादशी पारण कथा धर्मसंकट का अद्भुत उदाहरण है। एक वर्ष के एकादशी व्रत के बाद राजा को द्वादशी तिथि में पारण करना था। उसी समय दुर्वासा ऋषि भोजन निमंत्रण स्वीकार कर यमुना स्नान को चले गए और देर कर दी। राजा के सामने संकट था कि यदि वे पारण न करें तो व्रत भंग होगा, और यदि भोजन कर लें तो अतिथि का अपमान होगा। ब्राह्मणों ने उपाय बताया कि जल ग्रहण करना दोनों स्थितियों के बीच का धर्मसम्मत मार्ग है। अम्बरीष ने केवल जल पिया और अतिथि की प्रतीक्षा करते रहे।
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