विष्णु उपासनादेवशयनी एकादशी पर विष्णु जी क्यों सोते हैं?देवशयनी एकादशी पर भगवान विष्णु राजा बलि को दिए वचन के कारण पाताल लोक में वास करते हैं — इसे ही उनकी योगनिद्रा कहते हैं। यह आषाढ़ शुक्ल एकादशी से कार्तिक शुक्ल एकादशी तक चार महीने (चातुर्मास) चलता है। इस दौरान विवाह आदि मांगलिक कार्य नहीं होते।#देवशयनी एकादशी#विष्णु शयन#चातुर्मास
मंत्र और स्तोत्रभगवान विष्णु को जगाने का मंत्र क्या है?जाग्रत मंत्र: 'उत्तिष्ठोत्तिष्ठ गोविन्द त्यज निद्रां जगत्पते। त्वयि सुप्ते जगन्नाथ जगत्सुप्तमिदं भवेत्...' अर्थ: हे गोविंद! जागें — आपके सोने पर सारा जगत सुप्त हो जाता है। इस मंत्र से चातुर्मास समाप्त और मांगलिक कार्य शुरू।
दार्शनिक आधारदेवशयनी एकादशी से 'चातुर्मास' क्यों शुरू होता है?इस दिन से देवताओं की रात्रि शुरू होती है और वर्षा ऋतु के कारण साधु-संत यात्रा रोककर एक जगह तपस्या करते हैं। इसलिए इस दिन से 4 महीने का 'चातुर्मास' शुरू होता है।#चातुर्मास#वर्षा ऋतु#तपस्या
व्रत एवं त्योहारश्रावण मास में क्या खाना वर्जित है?श्रावण में मांसाहार, हरी पत्तेदार सब्जियाँ (पालक, मेथी, गोभी), प्याज-लहसुन, बैंगन, कच्चा दूध-दही, कढ़ी और नशीले पदार्थ वर्जित हैं। शास्त्र और वैज्ञानिक दोनों आधार पर सात्विक भोजन का पालन करना इस मास का विशेष नियम है।#श्रावण#सावन#वर्जित भोजन
त्योहार पूजातुलसी विवाह के बाद शादी विवाह शुरू होने का क्या कारण है?तुलसी विवाह बाद शादी: विष्णु जागरण (दैवी आशीर्वाद उपलब्ध), चातुर्मास समाप्ति (4 माह वर्जन हटा), प्रथम दैवी विवाह (तुलसी+शालिग्राम), ऋतु अनुकूल (यात्रा सुगम), शुभ मुहूर्त प्रचुर (मार्गशीर्ष-माघ)।#तुलसी विवाह#देवउठनी#विवाह मुहूर्त
व्रत विधिदेवशयनी एकादशी से देवउठनी तक शुभ कार्य क्यों नहीं करते?चातुर्मास: विष्णु निद्रा (दैवी कृपा अनुपलब्ध), वर्षा ऋतु (यात्रा कठिन), तप-साधना काल, जीव रक्षा (अहिंसा)। वर्जित: विवाह, मुण्डन, गृह प्रवेश। अनुमत: पूजा, व्रत, दान। देवउठनी = मुक्ति → विवाह आरम्भ।#चातुर्मास#देवशयनी#देवउठनी
व्रत विधिहरिशयनी एकादशी पर विष्णु पूजा कैसे करें?हरिशयनी एकादशी: आषाढ़ शुक्ल एकादशी। विष्णु योगनिद्रा आरम्भ, चातुर्मास प्रारम्भ (4 माह शुभ कार्य वर्जित)। विधि: विष्णु शयन सज्जा → षोडशोपचार → 'ॐ नमो भगवते वासुदेवाय' 1008 जप → चातुर्मास संकल्प → दान। प्रबोधिनी तक विष्णु सोते हैं।#हरिशयनी एकादशी#देवशयनी#चातुर्मास
व्रत एवं पर्वचातुर्मास में क्या क्या नियम पालन करने चाहिएचातुर्मास नियम: सावन = साग त्याग, भाद्रपद = दही, आश्विन = दूध, कार्तिक = दाल। शुभ/मांगलिक कार्य वर्जित। भक्ति: एकादशी व्रत, गीता/विष्णु सहस्रनाम। दान अवश्य। ब्रह्मचर्य, भूमि शयन, सादा भोजन, वाणी संयम। मूल भावना: संयम + भक्ति + आत्मशुद्धि।#चातुर्मास#नियम#संयम
व्रत एवं पर्वदेवशयनी और देवउठनी एकादशी में क्या अंतर हैदेवशयनी (आषाढ़ शुक्ल एकादशी) = विष्णु का शयन, चातुर्मास आरम्भ, शुभ कार्य बन्द। देवउठनी (कार्तिक शुक्ल एकादशी) = विष्णु का जागरण, चातुर्मास समाप्त, शुभ कार्य + विवाह आरम्भ, तुलसी विवाह। ~4 मास अन्तराल। पद्मपुराण: देवउठनी = 1000 अश्वमेध फल।#देवशयनी#देवउठनी#एकादशी