विस्तृत उत्तर
अम्बरीष महाराज एकादशी व्रत के महान आदर्श माने जाते हैं। उन्होंने केवल एक दिन नहीं, बल्कि पूरे एक वर्ष तक एकादशी-द्वादशी व्रत का पालन किया। कार्तिक मास में मधुवन में उन्होंने व्रत की पूर्णाहुति की, यमुना स्नान किया, भगवान विष्णु की पूजा की और ब्राह्मणों को दान दिया। पारण के समय दुर्वासा ऋषि के कारण धर्मसंकट आया। अम्बरीष ने शास्त्रसम्मत उपाय से केवल जल ग्रहण किया। इस कथा से एकादशी व्रत में पारण समय, अतिथि धर्म और भगवान की कृपा तीनों का महत्व समझ आता है।
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