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व्रत एवं पर्व📜 पद्म पुराण, मत्स्यपुराण, स्कन्द पुराण1 मिनट पठन

माघ मास में स्नान का क्या विशेष महत्व है

संक्षिप्त उत्तर

माघ स्नान: मत्स्यपुराण — माघ नित्य स्नान = सर्वतीर्थ + सर्वयज्ञ फल। कल्पवास: प्रयागराज में 1 मास, 3 बार स्नान। मकर संक्रान्ति, मौनी अमावस्या, माघ पूर्णिमा विशेष। ब्रह्म मुहूर्त में ठण्डे जल में = तप। सर्वपापनाश, मोक्ष मार्ग।

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विस्तृत उत्तर

माघ मास (जनवरी-फरवरी) हिन्दू पंचांग में स्नान-दान के लिए सर्वोत्तम माना गया है।

शास्त्रीय महत्व

  • मत्स्यपुराण: 'माघे मासि सदा स्नानं कुर्याद्यः शुचिमानवः। सर्वतीर्थफलं तस्य सर्वयज्ञफलं लभेत्॥' — माघ में नित्य स्नान करने वाला सर्वतीर्थ + सर्वयज्ञ फल प्राप्त करता है।
  • इस मास में गंगा/नदी स्नान का पुण्य अन्य मासों से कई गुना अधिक।

कल्पवास

माघ मास में संगम तट (प्रयागराज) पर कल्पवास की परम्परा — एक मास तक तम्बू में रहकर प्रतिदिन तीन बार स्नान, ध्यान, सात्विक भोजन, भूमि शयन। माघ मेला (प्रयागराज) इसी कारण प्रसिद्ध।

विशेष तिथियाँ

  • मकर संक्रान्ति (माघ आरम्भ) — गंगासागर/प्रयागराज स्नान।
  • मौनी अमावस्या — मौन व्रत + स्नान।
  • माघ पूर्णिमा — अत्यन्त पुण्यदायी।
  • बसन्त पंचमी — सरस्वती पूजा।

स्नान विधि

प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में। ठण्डे जल में (शीत ऋतु में तपस्या स्वरूप)। स्नान मंत्र पढ़कर। स्नान के बाद सूर्य अर्घ्य + दान।

फल: सर्वपापनाश, मोक्ष मार्ग, आरोग्य, तप का फल।

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शास्त्रीय स्रोत
पद्म पुराण, मत्स्यपुराण, स्कन्द पुराण
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