📖
विस्तृत उत्तर
नारायण बलि गंगा, यमुना, नैमिषारण्य या पुष्कर जैसे पवित्र तीर्थों में किया जाना चाहिए। इसे स्वच्छ जल के समीप या कृष्ण मंदिर में भी संपन्न किया जा सकता है। गरुड़ पुराण निर्देश देता है कि यह यज्ञ 5 श्रेष्ठ और विद्वान ब्राह्मणों के माध्यम से किया जाना चाहिए। यह अनुष्ठान अकाल मृत्यु प्राप्त आत्मा को प्रेत योनि के कष्टों और 64 प्रकार की मृत्यु-बाधाओं से मुक्त कर सद्गति प्रदान करता है।
🔗
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक
इसे अपने प्रियजनों के साथ साझा करें
क्या यह उत्तर सहायक था?





