विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवतमाहात्म्य में भागवत कथा को तीर्थों से श्रेष्ठ बताने का आधार उसका फल है। सनकादि कहते हैं कि जिस घर में नित्य भागवत कथा होती है, वह घर स्वयं तीर्थरूप हो जाता है और वहाँ रहने वालों के पाप नष्ट हो जाते हैं। वे आगे कहते हैं कि हजार अश्वमेध और सैकड़ों वाजपेय यज्ञ भी शुकशास्त्र की कथा के सोलहवें अंश के बराबर नहीं हो सकते। फिर स्पष्ट कहा गया है कि गंगा, गया, काशी, पुष्कर और प्रयाग जैसे तीर्थ भी फल की दृष्टि से इस कथा की समता नहीं कर सकते। इसलिए भागवत कथा की श्रेष्ठता उसके पाप-नाश और मुक्ति-दायक फल से बताई गई है।
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